🏘️ जब गाँव का मुखिया ही बिकाऊ हो, तो उस गाँव का विकास कैसे होगा?
बिहार के गाँवों की सच्चाई, पंचायत व्यवस्था की खामियाँ और जनता की असली ज़िम्मेदारी
यह सवाल हर गाँव में गूंज रहा है
सुबह घर से निकलते ही
टूटी सड़क,
नाली का गंदा
पानी,
नल लगा है
लेकिन पानी नहीं,
स्कूल है लेकिन
पढ़ाई नहीं,
और हर चुनाव
में वही चेहरे, वही वादे।
फिर मन में एक सवाल उठता है —
“हमारा गाँव आज भी वैसा का वैसा क्यों है?”
क्या सरकार पैसा नहीं भेजती?
क्या योजनाएँ
नहीं आतीं?
या फिर सच्चाई
कहीं और छुपी है?
हकीकत यह है कि
👉
समस्या सिर्फ
सरकार या सिस्टम की नहीं,
👉
समस्या हमारी
पंचायत व्यवस्था और हमारी सोच की भी है।
आज बिहार के हज़ारों गाँवों की हालत एक जैसी है —
और दुर्भाग्य
से हमारा गाँव भी उसी सच्चाई का हिस्सा है।
🏛️ Panchayati Raj System: जो गाँव को ताकत देने के लिए बना था
भारत में Panchayati Raj System की नींव इस सोच
के साथ रखी गई थी कि
गाँव का विकास
ऊपर से नहीं,
बल्कि नीचे से
— यानी गाँव से ही तय होगा।
इस व्यवस्था के तहत:
- मुखिया
- वार्ड सदस्य
- पंचायत समिति
- जिला परिषद
सबका उद्देश्य था:
✔️
योजनाओं को
ज़मीन पर उतारना
✔️
जनता को निर्णय
में शामिल करना
✔️
पारदर्शी और
जवाबदेह व्यवस्था बनाना
लेकिन जब नेतृत्व गलत दिशा में चला जाए,
तो यही
व्यवस्था गाँव को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे धकेलने लगती है।
👤 मुखिया (Mukhiya): सबसे ज़िम्मेदार, लेकिन सबसे ताकतवर पद
ग्राम पंचायत में मुखिया सबसे अहम पद होता है।
सरकारी योजनाओं
से लेकर लाभार्थी चयन तक,
लगभग हर बड़े
फैसले की चाबी मुखिया के हाथ में होती है।
लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब:
- मुखिया चुनाव में पैसा बाँटकर जीतता है
- सेवा की जगह उसे निवेश समझता है
- और पंचायत को अपनी निजी जागीर बना लेता है
आज कई गाँवों में मुखिया:
👉
30–50 लाख रुपये खर्च कर चुनाव जीतता है।
अब सवाल उठता है —
क्या कोई
व्यक्ति इतना पैसा खर्च कर के
सिर्फ सेवा
करने आता है?
नहीं।
वह पहले:
- अपना पैसा निकालता है
- फिर अधिकारी, ठेकेदार, दलाल, मिस्त्री — सबका हिस्सा जाता है
- और अंत
में गाँव के हिस्से में बचता है
👉 नाम मात्र विकास
🧑⚖️ वार्ड सदस्य (Ward Member): आवाज़ बनने वाला पद, जो अक्सर चुप रहता है
वार्ड सदस्य का काम होता है:
- अपने वार्ड की समस्याएँ पंचायत में रखना
- सड़क, नाली, पानी, लाइट जैसी जरूरतें उठाना
- जनता और पंचायत के बीच पुल बनना
लेकिन हकीकत यह है कि
अधिकतर वार्ड
सदस्य:
- मुखिया के दबाव में रहते हैं
- या खुद उसी सिस्टम का हिस्सा बन जाते हैं
जो वार्ड सदस्य सवाल उठाता है:
- उसे नजरअंदाज किया जाता है
- अगली बार टिकट नहीं मिलता
- या उसे अकेला छोड़ दिया जाता है
इस कारण गाँव की असली समस्याएँ
पंचायत की
फाइलों तक ही नहीं पहुँच पातीं।
🪑 सरपंच / मुखिया: नाम बदला, सोच नहीं
कई जगहों पर लोग मुखिया को सरपंच कहते हैं।
नाम चाहे जो हो,
अगर सोच सही
नहीं है, तो पद बेकार हो जाता है।
सरपंच या मुखिया का असली काम:
- जनता की सेवा
- पारदर्शिता
- जवाबदेही
होना चाहिए।
लेकिन सत्ता मिलते ही:
- घमंड
- पक्षपात
- और लालच
अगर हावी हो जाए,
तो वही पद गाँव
के पतन की वजह बन जाता है।
❌ जब पंचायत चुनाव लोकतंत्र नहीं, सौदा बन जाए
आज पंचायत चुनाव विकास का मंच नहीं,
बल्कि खुला सौदा बन चुका है।
चुनाव आते ही:
- ₹2000–₹5000 नकद
- शराब की बोतल
- मुर्गा-मटन की दावत
- जाति और आपसी नफ़रत
लोगों को विकास नहीं,
तुरंत मिलने
वाला फायदा दिखाया जाता है।
और दुखद सच्चाई यह है कि
कई लोग
खुशी-खुशी इसमें शामिल हो जाते हैं।
🗳️ वोट बिकेगा तो भविष्य भी बिकेगा
वोट सिर्फ पाँच साल का फैसला नहीं होता,
वह पूरे गाँव
की दिशा तय करता है।
आज लिया गया ₹2000-5000:
- दो दिन में खत्म हो जाएगा
लेकिन:
- टूटी सड़क
- गंदा पानी
- बेरोज़गारी
- पलायन
ये सब सालों तक साथ रहेगा।
📄 योजनाएँ बहुत, ज़मीन पर कुछ नहीं
हर साल गाँवों के लिए योजनाएँ आती हैं:
- नल-जल योजना
- गली-नाली योजना
- प्रधानमंत्री आवास
- मनरेगा
- स्ट्रीट लाइट
लेकिन ज़मीन पर क्या होता है?
✔️ बोर्ड लग जाता है — कार्य पूर्ण
❌
काम अधूरा
✔️ भुगतान हो जाता है
❌
गुणवत्ता शून्य
जनता को न जानकारी दी जाती है,
न हिसाब।
⚠️ पंचायत व्यवस्था की मुख्य (Key) समस्याएँ
1️ चुनाव में पैसा और शराब
जब वोट बिकता है,
तो नेतृत्व भी
बिकाऊ हो जाता है।
2️ पारदर्शिता की कमी
न खर्च का हिसाब,
न सूचना बोर्ड,
न सार्वजनिक
बैठक।
3️ ठेकेदार–दलाल सिस्टम
गुणवत्ता से ज़्यादा कमीशन पर काम होता है।
4️ अधिकारी–पंचायत मिलीभगत
निगरानी करने वाले ही चुप रहते हैं।
5️ जनता की उदासीनता
“हमका का” वाली सोच सबसे बड़ा दुश्मन है।
🚶♂️ पलायन: विकास न होने की सबसे बड़ी सजा
जब गाँव में:
- रोजगार नहीं
- शिक्षा नहीं
- सुविधाएँ नहीं
तो लोग मजबूर होकर शहर जाते हैं।
यह पलायन नहीं,
👉
व्यवस्था की
असफलता है।
🔨 खुद से जो बन सकता है, उसे खुद करना सीखो
हर काम सरकार नहीं करेगी।
अगर:
- नाली साफ हो सकती है
- सड़क के गड्ढे भरे जा सकते हैं
- बच्चों को पढ़ाया जा सकता है
तो शुरुआत खुद से होनी चाहिए।
जब लोग जुड़ते हैं,
तभी सिस्टम
डरता है।
📢 सवाल पूछना अपराध नहीं, अधिकार है
हर नागरिक का हक है:
- पंचायत से हिसाब माँगने का
- RTI डालने का
- सोशल मीडिया पर आवाज़ उठाने का
डर खत्म होगा,
तो भ्रष्टाचार
भी खत्म होगा।
🌱 असली गाँव विकास क्या है?
असली विकास मतलब:
- ईमानदार नेतृत्व
- साफ पानी
- अच्छी सड़क
- शिक्षा
- रोजगार
- और जागरूक नागरिक
गाँव बदलेगा, जब सोच बदलेगी
अगर:
- मुखिया भ्रष्ट है
- वार्ड चुप हैं
- अधिकारी मिले हुए हैं
- और जनता सो रही है
तो गाँव का विकास सिर्फ भाषणों में होगा।
लेकिन अगर:
- जनता जाग गई
- वोट बिकना बंद हो गया
- और सवाल पूछे जाने लगे
तो वही गाँव एक दिन मिसाल बनेगा।
गाँव बदलेगा,
जब सोच बदलेगी।

1 Comments
Yah sachi bilkul sahi hai kyoki bihar ke lagbhag 90% gaon ki yahi kahani hai
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